GBP/USD अवलोकन: 7 जुलाई — क्या पाउंड यूरो से अधिक मजबूत है?

GBP/USD मुद्रा जोड़ी में सोमवार को बिल्कुल भी कोई उल्लेखनीय गतिविधि देखने को नहीं मिली, जिसका मुख्य कारण आर्थिक कैलेंडर में किसी भी महत्वपूर्ण घटना का अभाव था।

2026 को अमेरिकी डॉलर के लिए एक और "कमज़ोर वर्ष" माना जा रहा था। लेकिन घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। डोनाल्ड ट्रंप के मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दबाव बढ़ गया। इसके परिणामस्वरूप तेल और गैस की कीमतों में तेज़ उछाल आया और दुनिया के कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा।

बढ़ती महंगाई के जवाब में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को अपनी प्रमुख ब्याज दरें (Key Interest Rates) बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस दौरान अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जबकि माना जाता है कि ट्रंप की प्राथमिकता डॉलर को कमजोर करने की थी। दूसरी ओर, दुनिया भर के उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ा।

लेख के अनुसार, ईरान के खिलाफ ट्रंप की कार्रवाई से अपेक्षित राजनीतिक परिणाम नहीं मिले। तेहरान ने न तो अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने का संकेत दिया और न ही अपने परमाणु ईंधन भंडार को सौंपने की इच्छा दिखाई। साथ ही, अमेरिका में ट्रंप की लोकप्रियता (Approval Rating) भी उनके दोनों कार्यकालों के सबसे निचले स्तरों पर पहुँच गई, क्योंकि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ईरान के साथ संघर्ष को आवश्यक या लाभदायक नहीं मानते। लेख का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिका को मुख्य रूप से ऊर्जा निर्यात बढ़ने के कारण अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ।

तकनीकी दृष्टि से देखें तो बाज़ार ने एक दीर्घकालिक साइडवेज़ (Flat) रेंज बना ली है, जो साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर सबसे स्पष्ट दिखाई देती है।

पिछले एक वर्ष में GBP/USD जोड़ी पाँच बार 1.3040–1.3170 के दायरे में पहुँची, लेकिन हर बार इससे नीचे गिरने में असफल रही। इसी प्रकार, इसी अवधि में यह जोड़ी चार बार 1.3660–1.3790 के दायरे तक पहुँची। इसलिए इन दोनों स्तरों को फिलहाल साइडवेज़ चैनल की निचली और ऊपरी सीमाएँ माना जा सकता है।

चूँकि कीमत हाल ही में निचली सीमा तक पहुँच चुकी है, इसलिए—भले ही इसके पीछे कोई मजबूत मौलिक कारण न हो—आने वाले हफ्तों में ब्रिटिश पाउंड फिर से 1.3660–1.3790 के ऊपरी दायरे की ओर बढ़ सकता है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछले एक वर्ष की स्थिरता के बावजूद GBP/USD पिछले पाँच वर्षों से दीर्घकालिक तेजी (Uptrend) में है, जबकि उससे पहले लगभग 16–17 वर्षों तक यह गिरावट (Downtrend) में रहा था।

चूँकि कोई भी ट्रेंड हमेशा नहीं चलता, इसलिए संभव है कि 2022 से एक नया वैश्विक तेजी का चक्र शुरू हुआ हो। लेख के अनुसार, अमेरिकी डॉलर को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने के लिए अभी भी पर्याप्त मौलिक कारण दिखाई नहीं देते। इसी वजह से लेखक का मानना है कि लंबे समय में ब्रिटिश पाउंड मजबूत होता रह सकता है।

लेख के अंत में यह भी कहा गया है कि अमेरिका की संरक्षणवादी (Protectionist) नीतियाँ धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों को अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी घटा रहे हैं, जिसे लेखक अमेरिकी डॉलर के दीर्घकालिक भविष्य का एक महत्वपूर्ण संकेत मानता है।

7 जुलाई तक पिछले पाँच ट्रेडिंग दिनों में GBP/USD मुद्रा जोड़ी की औसत वोलैटिलिटी (अस्थिरता) 69 पिप्स रही, जिसे "मध्यम (Average)" माना जाता है। मंगलवार, 7 जुलाई को इस जोड़ी के 1.3296 से 1.3434 के बीच कारोबार करने की संभावना है।

लीनियर रिग्रेशन चैनल की ऊपरी सीमा नीचे की ओर मुड़ चुकी है, जो मौजूदा गिरावट (डाउनट्रेंड) के जारी रहने का संकेत देती है। वहीं, CCI (Commodity Channel Index) इंडिकेटर ओवरसोल्ड क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और दो बुलिश डाइवर्जेंस बना चुका है, जो संकेत देते हैं कि गिरावट का मौजूदा रुझान समाप्त होने के करीब हो सकता है।

निकटतम सपोर्ट स्तर: S1 – 1.3306 S2 – 1.3245 S3 – 1.3184 निकटतम रेज़िस्टेंस स्तर: R1 – 1.3367 R2 – 1.3428 R3 – 1.3489 ट्रेडिंग सिफारिशें:

GBP/USD जोड़ी फिलहाल गिरावट के रुझान में बनी हुई है, जिसे डेली और वीकली चार्ट पर दिखाई देने वाले दीर्घकालिक तेजी (अपट्रेंड) के भीतर एक तकनीकी सुधार (करेक्शन) माना जा सकता है।

अमेरिकी डॉलर के लिए समग्र फंडामेंटल परिदृश्य अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, 2026 में भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitical Factors) और फेडरल रिजर्व (Fed) के सख्त (हॉकिश) रुख ने डॉलर को उल्लेखनीय समर्थन दिया है।

यदि कीमत मूविंग एवरेज के नीचे बनी रहती है, तो शॉर्ट (बिकवाली) पोज़िशन 1.3184 के लक्ष्य के साथ ली जा सकती है। यदि कीमत मूविंग एवरेज के ऊपर चली जाती है, तो लॉन्ग (खरीदारी) पोज़िशन 1.3428 और 1.3489 के लक्ष्य के साथ उपयुक्त रहेगी।

फिलहाल बेयर्स (विक्रेता) बिना किसी स्पष्ट मौलिक कारण के भी बाज़ार में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।

चार्ट में उपयोग किए गए संकेतकों का अर्थ: लीनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channels): वर्तमान ट्रेंड की दिशा निर्धारित करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में संकेत देते हैं, तो इसका अर्थ है कि ट्रेंड मजबूत है। मूविंग एवरेज लाइन (20.0, स्मूद): अल्पकालिक ट्रेंड और ट्रेडिंग की दिशा निर्धारित करती है। मरे (Murray) स्तर: संभावित लक्ष्य (Target) और करेक्शन स्तर दर्शाते हैं। वोलैटिलिटी स्तर (लाल रेखाएँ): मौजूदा अस्थिरता के आधार पर अगले दिन कीमत के संभावित दायरे का संकेत देते हैं। CCI (Commodity Channel Index): जब यह -250 से नीचे (ओवरसोल्ड) या +250 से ऊपर (ओवरबॉट) पहुँचता है, तो यह विपरीत दिशा में संभावित ट्रेंड रिवर्सल का संकेत देता है।