मध्य पूर्व से वास्तविक तेल आपूर्ति की संभावनाओं का आकलन करने की कोशिश में बाजार, तेल की कीमतें व्यापक दायरे में कारोबार कर रही हैं।

तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पों के बाद बाजार मध्य पूर्व से वास्तविक तेल आपूर्ति की संभावनाओं का आकलन करने की कोशिश कर रहा है। Brent कच्चा तेल बुधवार को 5% से अधिक की तेज़ बढ़त के बाद अब 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, जबकि WTI लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

गौर करने वाली बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिकी सेना लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले कर रही है, वहीं ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि बाजार एक ओर संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका से घबराया हुआ है, तो दूसरी ओर वास्तविक आपूर्ति पर पड़े नुकसान के स्तर को लेकर सतर्क और संदेहपूर्ण भी बना हुआ है।

मौजूदा स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र अब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, और फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम भी इसी से जुड़ा हुआ है। यदि यह जलडमरूमध्य दोबारा बंद हो जाता है, तो तेल की कीमतों में लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, यदि तेल आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रहती है, तो अगली बार संघर्ष बढ़ने तक कीमतों के मौजूदा स्तर के आसपास बने रहने की संभावना है। यह स्थिति ट्रेडर्स के लिए एक स्पष्ट संकेत बन गई है, जहां तेल की भविष्य की दिशा मुख्य रूप से इन दो संभावित परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

गुरुवार को जारी वेसल ट्रैकिंग (Vessel Tracking) के आंकड़ों से पता चला कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों की संख्या में कमी आई है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि जो जहाज़ अभी भी गुजर रहे हैं, वे मुख्य रूप से ईरान द्वारा स्वीकृत मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जो जलडमरूमध्य के उत्तरी हिस्से के अधिक निकट है। हाल के दिनों में ईरान ने निर्धारित मार्ग से बाहर जाने वाले जहाज़ों पर हमले किए हैं, जिससे वह इसी मार्ग को प्राथमिकता दिलाना चाहता है। दूसरी ओर, अमेरिका समर्थित ओमानी कॉरिडोर लगभग पूरी तरह खाली पड़ा हुआ है।

यह जहाज़ मालिकों के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। वे अब अमेरिकी सुरक्षा वाले मार्ग के बजाय तेहरान द्वारा अनुमोदित मार्ग को अधिक सुरक्षित मान रहे हैं। इससे अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत मिलता है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों पर ईरान का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

इस सप्ताह की शुरुआत में तीन जहाज़ों पर हुए हमलों से पहले, इस जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही लगातार बढ़ रही थी, जिससे यह संकेत मिल रहा था कि समुद्री आपूर्ति व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। लेकिन अब, जलमार्ग पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करने की ईरानी कोशिशों के कारण सामान्य तेल आपूर्ति बहाल होने की प्रक्रिया फिर से बाधित होने के खतरे में पड़ गई है।

तेल के मौजूदा तकनीकी परिदृश्य के अनुसार, खरीदारों (बायर्स) के लिए सबसे पहले $73.79 के निकटतम रेजिस्टेंस स्तर को पार करना आवश्यक होगा। यदि यह स्तर सफलतापूर्वक टूट जाता है, तो कीमत $76.30 तक बढ़ सकती है। हालांकि, इस स्तर के ऊपर ब्रेकआउट हासिल करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। इसके बाद अगला प्रमुख लक्ष्य $78.70 रहेगा।

वहीं, यदि तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो विक्रेता (बेयर्स) $71.70 के स्तर पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करेंगे। यदि वे इसमें सफल रहते हैं, तो मौजूदा रेंज का ब्रेकआउट तेजी (Bullish) की स्थिति को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और तेल की कीमत $69.58 के निचले स्तर तक गिर सकती है। इसके बाद गिरावट जारी रहने पर कीमत $67.22 तक पहुंचने की भी संभावना है।