मंगलवार को EUR/USD मुद्रा जोड़ी में कारोबार अपेक्षाकृत शांत रहा, हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में बाजार की अस्थिरता (Volatility) में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली। सामान्य परिस्थितियों में इस लेख में हम अमेरिका की महंगाई (Inflation) रिपोर्ट या फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श (Kevin Warsh) के भाषण का विश्लेषण करते, लेकिन मौजूदा समय में जब मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर संघर्ष की चपेट में है, तब महंगाई या मौद्रिक नीति पर चर्चा का महत्व काफी कम हो जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि न तो तेहरान और न ही वॉशिंगटन ने आधिकारिक रूप से बातचीत की प्रक्रिया समाप्त करने की घोषणा की है। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को छोड़ दें, जिनका रुख दिन में कई बार बदल सकता है, तो किसी भी अधिकारी ने औपचारिक रूप से युद्ध दोबारा शुरू होने की घोषणा नहीं की है। सरल शब्दों में कहें तो कोई भी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि मौजूदा गतिरोध (Deadlock) का कोई दूसरा समाधान न होने के कारण संघर्ष लगभग अपरिहार्य बनता जा रहा है।
लेखक के अनुसार, ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूर्ण और एकतरफा नियंत्रण चाहता है। इसलिए, यदि कोई जहाज तेहरान द्वारा तय किए गए मार्गों का पालन किए बिना या आवश्यक अनुमति के बिना वहां से गुजरने की कोशिश करता है, तो उस पर हमला किया जाता है। दूसरी ओर, अमेरिका स्वयं को वैश्विक सुरक्षा का संरक्षक मानते हुए ऐसी घटनाओं का जवाब देना अपना दायित्व समझता है। इसके बाद ईरान इन अमेरिकी हमलों को युद्धविराम (Ceasefire) का उल्लंघन मानते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करता है।
लेखक का कहना है कि इस समय परमाणु समझौते (Nuclear Deal) का मुद्दा लगभग पीछे छूट गया है। उनके अनुसार, उस स्तर तक पहुंचने से पहले दोनों पक्षों को कम-से-कम हॉर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर किसी समझौते तक पहुंचना होगा।
लेखक के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर प्रभावी रूप से अवरुद्ध (Blocked) हो गया है। चाहे वॉशिंगटन और तेहरान इस स्थिति को किसी भी नाम से पुकारें, वास्तविकता यह है कि अधिकांश जहाज फिलहाल इस मार्ग से गुजरने का जोखिम नहीं लेना चाहते। परिणामस्वरूप, इस जलमार्ग से समुद्री यातायात लगभग रुक गया है। साथ ही, अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर एक नई नाकेबंदी भी लागू कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान समर्थित हूती (Houthis) समूह ने सऊदी अरब पर बड़े पैमाने पर हमला किया है और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) को भी बंद करने की धमकी दी है। लेखक का मानना है कि यदि हॉर्मुज पूरी तरह बंद हो जाता है और बाब-अल-मंदेब भी अवरुद्ध हो जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 150–200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। लेखक यह भी राय व्यक्त करता है कि दुनिया को मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और मध्य पूर्व के देशों को भी समुद्री मार्गों पर निर्भर हुए बिना ऊर्जा निर्यात के वैकल्पिक साधन विकसित करने चाहिए।
लेखक यह भी उल्लेख करता है कि बाजार ने मध्य पूर्व में बढ़े नए तनाव पर अपेक्षाकृत सीमित प्रतिक्रिया दी है। उनके अनुसार, इसका कारण यह है कि युद्ध से जुड़ी खबरों का असर अब पहले जैसा नहीं रहा। बाजार महीनों या वर्षों तक केवल युद्ध के आधार पर ट्रेड नहीं कर सकता।
हालांकि, लेखक का कहना है कि युद्ध अप्रत्यक्ष रूप से बाजार को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों जलडमरूमध्य बाधित हो जाते हैं, तो तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आएगा, जिससे महंगाई भी बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों (Central Banks) को अधिक सख्त (Hawkish) मौद्रिक नीति अपनानी पड़ सकती है, और बाजार का सबसे अधिक ध्यान फेडरल रिजर्व (Fed) पर रहेगा।
लेखक के अनुसार, ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर भू-राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि फेड द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी (Fed Tightening) के कारण मजबूत हो सकता है। हालांकि, लेखक स्वयं इस संभावना को बहुत मजबूत नहीं मानता, क्योंकि उसके अनुसार डॉलर के पक्ष में अधिकांश सकारात्मक कारकों को बाजार पहले ही कीमतों में शामिल कर चुका है।
15 जुलाई तक पिछले पांच ट्रेडिंग दिनों में EUR/USD मुद्रा जोड़ी की औसत अस्थिरता (Average Volatility) 54 पिप्स रही, जिसे "मध्यम (Average)" श्रेणी में माना जाता है। बुधवार के लिए अनुमान है कि यह जोड़ी 1.1372 से 1.1480 के दायरे में कारोबार कर सकती है। ऊपरी रिग्रेशन चैनल (Upper Regression Channel) नीचे की ओर झुका हुआ है, जो मंदी (Bearish Trend) के जारी रहने का संकेत देता है। वहीं, CCI (Commodity Channel Index) ओवरसोल्ड (Oversold) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और उसने दो बुलिश डाइवर्जेंस (Bullish Divergences) बनाए हैं, जो गिरावट के रुझान के समाप्त होने और संभावित तेजी का संकेत देते हैं।
निकटतम सपोर्ट स्तर (Support Levels) S1: 1.1414 S2: 1.1353 S3: 1.1292 निकटतम रेजिस्टेंस स्तर (Resistance Levels) R1: 1.1475 R2: 1.1536 R3: 1.1597 ट्रेडिंग सुझाव (Trading Recommendations)EUR/USD फिलहाल गिरावट के रुझान (Downtrend) में बना हुआ है, जिसे लेखक दीर्घकालिक वैश्विक तेजी (Global Uptrend) के भीतर चल रही एक सुधारात्मक गिरावट (Correction) मानता है। यह स्थिति दैनिक (Daily) और साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
लेखक के अनुसार, डॉलर के लिए दीर्घकालिक मौलिक (Fundamental) परिस्थितियां अभी भी नकारात्मक हैं, लेकिन 2026 में पहले भू-राजनीतिक घटनाओं और बाद में फेडरल रिजर्व के सख्त (Hawkish) रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन दिया है।
यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) से नीचे बनी रहती है, तो शॉर्ट (Sell) पोजीशन पर विचार किया जा सकता है, जिनके लक्ष्य 1.1372 और 1.1353 होंगे। यदि कीमत मूविंग एवरेज के ऊपर चली जाती है, तो लॉन्ग (Buy) पोजीशन 1.1475 और 1.1536 के लक्ष्यों के साथ उपयुक्त मानी जा सकती है।लेखक का यह भी कहना है कि विक्रेताओं (Bears) की पकड़ फिलहाल बिना किसी स्पष्ट कारण के भी बेहद मजबूत दिखाई दे रही है।
चार्ट में उपयोग किए गए संकेतकों की व्याख्या लीनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channels): वर्तमान ट्रेंड की दिशा निर्धारित करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में हों, तो ट्रेंड को मजबूत माना जाता है। मूविंग एवरेज (20,0, Smoothed): अल्पकालिक ट्रेंड और ट्रेडिंग की दिशा निर्धारित करता है। मरे लेवल्स (Murray Levels): संभावित लक्ष्य (Targets) और करेक्शन स्तर (Correction Levels) दर्शाते हैं। वोलैटिलिटी लेवल्स (लाल रेखाएं): मौजूदा अस्थिरता के आधार पर अगले कुछ दिनों में संभावित मूल्य दायरा (Price Channel) दर्शाते हैं। CCI (Commodity Channel Index): -250 से नीचे जाने पर बाजार ओवरसोल्ड (Oversold) माना जाता है, जिससे तेजी की ओर संभावित बदलाव का संकेत मिल सकता है। +250 से ऊपर जाने पर बाजार ओवरबॉट (Overbought) माना जाता है, जिससे गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।