धीमी और स्थिर चाल ही अंततः जीत दिलाती है। अमेरिकी डॉलर ने पिछले दिन आई गिरावट के बाद फिलहाल थोड़ी राहत ली है। इस गिरावट की वजह भी अहम थी। जून में अमेरिका की वार्षिक महंगाई दर (Inflation) घटकर 3.5% पर आ गई, जबकि वॉल स्ट्रीट जर्नल (Wall Street Journal) के विशेषज्ञों ने 3.8% रहने का अनुमान लगाया था। वहीं, मई का 4.2% का आंकड़ा अब महंगाई में तेज़ी की शुरुआत नहीं, बल्कि उसका शीर्ष स्तर (Peak) प्रतीत होता है।
अमेरिकी महंगाई की चाल
फ्यूचर्स बाजार की प्रतिक्रिया तुरंत देखने को मिली। जून के महंगाई आंकड़े आने के बाद फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक में फेडरल फंड्स रेट बढ़ाने की संभावना लगभग 40% से घटकर सिर्फ 17% रह गई। हालांकि, केवल एक महीने के आंकड़े किसी स्थायी रुझान की पुष्टि नहीं करते, लेकिन उन्होंने फिलहाल केंद्रीय बैंक से तत्काल कार्रवाई करने का आधार छीन लिया है और फेड चेयर केविन वार्श को 'इंतजार करो और स्थिति पर नजर रखो' (Wait-and-See) की नीति अपनाने का एक मजबूत तर्क दे दिया है।
हालांकि, केविन वार्श स्वयं इसे जीत मानने की जल्दबाजी में नहीं हैं। कांग्रेस में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि केवल एक महीने के आंकड़ों के आधार पर यह घोषित कर देना कि "मिशन पूरा हो गया", अभी जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि महंगाई पर निर्णायक निष्कर्ष निकालने से पहले और आंकड़ों का इंतजार करना जरूरी है। यही फिलहाल फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष का भी दृष्टिकोण है।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाएं
ईरान में जारी युद्ध, जो अब साढ़े चार महीने से चल रहा है, ऊर्जा कीमतों के माध्यम से महंगाई पर दबाव डालने वाला सबसे बड़ा कारक बना हुआ है। पेट्रोल की कीमतें पिछले महीने की तुलना में 10% कम हुई हैं, लेकिन वे अभी भी एक साल पहले की तुलना में 27% अधिक हैं। वहीं, हालिया युद्धविराम (Ceasefire) के दौरान आई गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं। इसका मतलब है कि जुलाई में जून जैसी अप्रत्याशित महंगाई में गिरावट दोहराए जाने की संभावना कम है।
ING के अनुसार, बाजार
इससे एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है। अमेरिकी डॉलर नरम महंगाई (Soft Inflation) के आंकड़ों के कारण कमजोर हुआ, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव उसे जुलाई में ही फिर से मजबूती दिला सकते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि कौन सही साबित होगा—महंगाई के आंकड़े या तेल की कीमतें?
तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो EUR/USD के दैनिक चार्ट पर प्रमुख मुद्रा जोड़ी 1.137 से 1.147 के दायरे में समेकन (Consolidation) करती हुई दिखाई दे रही है। इस दायरे के ऊपर या नीचे निर्णायक ब्रेकआउट ही यूरो की अगली दिशा तय करेगा।
फिलहाल, रणनीति के तौर पर यूरो में तेजी आने पर बिक्री (Sell on Rise) और गिरावट आने पर खरीदारी (Buy on Dip) करना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।