मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव तेल बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Premium) को समर्थन दे रहा है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लगातार दसवें दिन भी हमलों के जारी रहने से समुद्री परिवहन (शिपिंग) से जुड़े जोखिम बढ़ गए हैं। इससे तेल बाज़ार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Premium) बना हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप तेल और सोने दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है।

तेल की कीमतों में यह वृद्धि मुद्रास्फीति (Inflation) के लिए एक नया झटका मानी जा रही है। यही कारण है कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, इस बार वैसा व्यवहार नहीं कर रहे हैं जैसा सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षित होता है।

BNY Mellon के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (U.S. Central Command) ने पुष्टि की है कि उसने ईरान में कमांड पोस्ट, मिसाइल लॉन्च साइट्स और वायु रक्षा प्रणालियों पर हमले किए हैं।

वहीं, ईरान ने कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं।

इसके अलावा, ब्रिटिश नौसेना की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट कई जहाज़ों पर भी हमले दर्ज किए गए हैं।

इस पृष्ठभूमि में, BNY Mellon का कहना है कि बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत बढ़कर 88.73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जबकि अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर चली गई है।

बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही में और अधिक बाधा आती है, तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी आ सकती है और भू-राजनीतिक जोखिम और भी बढ़ सकते हैं।

डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) के विश्लेषकों का कहना है कि सोमवार की खबरें पूरी तरह सकारात्मक नहीं थीं। उनके अनुसार, तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद फिर से कुछ सुधार देखने को मिला। यह गिरावट यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर समुद्री नाकाबंदी (Maritime Blockade) लगाने की मंशा जताने के बाद आई थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच, विश्लेषकों ने कुछ आशा भी व्यक्त की है। उनका कहना है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने पुष्टि की है कि विभिन्न मध्यस्थों द्वारा दिए गए प्रस्ताव ईरान तक पहुंचा दिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यमन के हूती नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों के कारण ब्रेंट कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत 1.30% बढ़कर 89.38 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है।

OCBC के रणनीतिकारों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही पहले ही काफी धीमी हो चुकी है। साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब से जुड़े समुद्री मार्गों को सीमित करने की योजना की खबरों के बाद तेल की कीमतों में और तेजी आई है।

OCBC के विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है, तो यह उन कुछ वैकल्पिक समुद्री मार्गों में से एक को भी प्रभावित कर सकता है, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान की भरपाई करने में सक्षम हैं। इससे इस क्षेत्र से वैश्विक तेल आपूर्ति और कम हो सकती है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि संघर्ष और अधिक बढ़ता है, तो लंबे समय तक तेल आपूर्ति बाधित रहने की आशंकाएं फिर से उभर सकती हैं और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि अप्रैल के अंत में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो मौजूदा स्तर से लगभग 40% अधिक है।

MUFG के विश्लेषकों का कहना है कि इस समय बाजार में प्रमुख चिंताओं में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, यमन में हूती विद्रोहियों की भूमिका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बूम की दीर्घकालिक स्थिरता शामिल हैं।

उनके अनुसार, हूती विद्रोहियों ने यह घोषणा की है कि वे अपनी राजधानी पर कथित घेराबंदी के जवाब में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी लागू करना चाहते हैं। इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) में जहाजों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाए हैं।

MUFG ने यह भी कहा कि यदि इस जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकाबंदी होती है, तो कई तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को स्वेज नहर (Suez Canal) और केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) के रास्ते लंबा मार्ग अपनाना पड़ सकता है। इससे कंटेनर शिपिंग दरों और वैश्विक परिवहन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

हालांकि, MUFG ने जोखिम का आकलन करते हुए यह भी कहा कि यदि आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न होता है, तो उसके लंबे समय तक बने रहने की संभावना कम है, क्योंकि अंसार अल्लाह (Ansar Allah / हूती आंदोलन) के पास लंबे समय तक इस प्रकार की नाकाबंदी बनाए रखने के सीमित विकल्प हैं।