जर्मन व्यवसायों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को निवेश के मामले में सीमित कर दिया है।

जर्मन कंपनियों का अमेरिका में निवेश घटा

2026 की पहली छमाही में जर्मन कंपनियों द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में किया गया प्रत्यक्ष निवेश तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। पूंजी के बड़े पैमाने पर बाहर जाने का मुख्य कारण अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है, जो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति के कारण पैदा हुई है।

जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट (IW) द्वारा बुंडेसबैंक के आंकड़ों के आधार पर की गई गणना के अनुसार, जर्मनी से अमेरिका में प्रत्यक्ष निवेश पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग दो-तिहाई घटकर सिर्फ €4.3 अरब ($5 अरब) रह गया। यह 2023 के बाद पहली छमाही का सबसे कमजोर परिणाम है और 2024 की इसी अवधि की तुलना में लगभग 80% की गिरावट है।

IW की शोधकर्ता समीना सुल्तान का कहना है कि यह तेज गिरावट जनवरी 2025 में ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के तुरंत बाद शुरू हुई। व्यापारिक रियायतें हासिल करने के लिए बार-बार दी गई टैरिफ की धमकियों और वास्तव में लगाए गए दंडात्मक शुल्कों ने यूरोपीय कंपनियों के लिए अमेरिका में भविष्य की लागत और बाजार तक पहुंच के नियमों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

2025 में ब्रसेल्स और वॉशिंगटन के बीच हुआ ट्रांस-अटलांटिक समझौता भी कारोबारी विश्वास बहाल करने में सफल नहीं रहा। इस समझौते में टैरिफ कम करने के बदले $600 अरब के पारस्परिक निवेश की प्रतिबद्धता का प्रस्ताव था। इसके बावजूद जर्मन कंपनियां अमेरिका में नई पूंजी लगाने से स्पष्ट रूप से हिचक रही हैं।

तुलना के लिए, महामारी से पहले के पांच वर्षों में पहली छमाही में जर्मन निवेश का औसत €15.8 अरब था, जो मौजूदा स्तर से लगभग चार गुना अधिक है।

विश्लेषकों के अनुसार, यहां एक दिलचस्प बाजार-विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जर्मन कंपनियां अमेरिका में नए बाहरी निवेश से बच रही हैं, लेकिन वहां पहले से चल रहे अपने कारोबार को सक्रिय रूप से समर्थन दे रही हैं। नए निवेश का प्रवाह ऐतिहासिक निचले स्तर से भी नीचे बना हुआ है, जबकि अमेरिका में पहले से कमाए गए मुनाफे को दोबारा वहीं निवेश करने का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहा है।

इसका मतलब है कि जर्मन कंपनियां अभी भी अमेरिकी बाजार को बेहद आकर्षक मानती हैं, लेकिन राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितता के कारण वे नई पूंजी बाहर से लाने के बजाय अमेरिका में कमाए गए पैसे से ही अपने कारोबार का विस्तार करना पसंद कर रही हैं।