अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP 7.8% बढ़ी, केंद्रीय बैंक के अनुमान से बेहतर।

भारत के सांख्यिकी सचिव सौरभ गर्ग ने सरकार के इस आकलन का बचाव किया कि अप्रैल-जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था साल-दर-साल 7.8% की दर से बढ़ी। उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि ये आंकड़े पक्षपातपूर्ण हैं या उन्हें कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

रिपोर्ट की गई 7.8% की वृद्धि दर अर्थशास्त्रियों के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7% के अनुमान से अधिक रही। यह पिछले साल की इसी तिमाही की 6.9% वृद्धि दर से भी तेज है। हालांकि, जनवरी-मार्च तिमाही की तुलना में आर्थिक वृद्धि धीमी हुई है। जनवरी-मार्च की वृद्धि दर को पहले 7.8% बताया गया था, जिसे संशोधित करके 8.6% कर दिया गया।

इन आंकड़ों को लेकर पूर्व वित्त और आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस की आलोचना के बाद सरकार ने आंकड़ों को स्पष्ट करने की कोशिश की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इन गणनाओं को “सांख्यिकीय बाजीगरी” (statistical gymnastics) बताया।

आलोचकों का तर्क था कि पिछली अवधि के आंकड़ों में नीचे की ओर किए गए संशोधनों से तुलना का आधार (base) बेहतर दिखाई देने लगा और इससे आर्थिक वृद्धि वास्तविकता से अधिक मजबूत नजर आई।

सांख्यिकी मंत्रालय ने आंकड़ों में किए गए संशोधनों के पीछे किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से इनकार किया। सौरभ गर्ग ने कहा कि ये बदलाव पद्धति (methodology) में सुधार के कारण किए गए हैं।

इन बदलावों में 2022/23 को आधार वर्ष बनाकर नई GDP सीरीज़ अपनाना, पुराने थोक मूल्य (Wholesale Price) के आंकड़ों की जगह प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) का इस्तेमाल करना, अधिक विस्तृत मूल्य संकेतकों (price indicators) को शामिल करना और अतिरिक्त डेटा स्रोतों का इस्तेमाल करना शामिल है।