वैश्विक तांबे की कीमतें एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और बढ़कर 14,635 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस तेजी की मुख्य वजह बाजार में तांबे की भौतिक आपूर्ति की भारी कमी है। इसके अलावा, यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि अमेरिका रिफाइंड तांबे के आयात पर आयात शुल्क (ड्यूटी) लगा सकता है।
कुल मिलाकर, इस औद्योगिक धातु की कीमत में इस साल अब तक लगभग 17% की बढ़ोतरी हो चुकी है और दिसंबर तथा जनवरी में बने पिछले उच्च स्तर भी आगे निकल गए हैं।
इस तेजी की मुख्य वजह लंबे समय से बना हुआ संरचनात्मक असंतुलन है। एक तरफ खदानों से तांबे का उत्पादन सीमित है, जबकि दूसरी तरफ AI डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण बनाने वाली कंपनियों और बिजली ग्रिड संचालकों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है।
ब्लूमबर्ग टीवी पर BlackRock International में थीमैटिक और सेक्टर निवेश प्रमुख Evi Hambro ने कहा कि बाजार पर बेहद ज्यादा दबाव है और कच्चे माल की आपूर्ति में हो रही रुकावटें सामान्य औसत स्तर से कहीं अधिक हैं।
अतिरिक्त तेजी का दबाव मौसमी मांग के चरम समय के करीब आने से भी बन रहा है। दुनिया के प्रमुख तांबा उपभोक्ता चीन में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है।
इन परिस्थितियों में कमोडिटी विश्लेषकों का आम तौर पर मानना है कि तांबे की कीमतों में तेजी जारी रहेगी और निकट भविष्य में 15,000 डॉलर प्रति टन के अगले महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करना संभव है।