ऊर्जा की कीमतों में तेज उछाल के कारण अमेरिका में उपभोक्ता महँगाई बढ़कर पाँच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में 0.6% की वृद्धि हुई और इसकी सालाना दर 3.7% रही। इसका मुख्य कारण पेट्रोल की कीमतों में 9.1% का उछाल था। पुरानी कारों की कीमतों में 0.7% की वृद्धि ने भी महँगाई बढ़ाने में योगदान दिया। खाद्य पदार्थों की कीमतों में मामूली गिरावट से ऊर्जा कीमतों के झटके का कुल प्रभाव केवल थोड़ा कम हो सका।
कीमतों में तेज वृद्धि से नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी परिवारों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। वास्तविक वेतन में लगातार छठे महीने गिरावट आई है, जबकि सितंबर में उपभोक्ताओं की महँगाई संबंधी उम्मीदें 4.0% से बढ़कर 4.6% हो गईं। कारोबारी जगत की धारणा इससे भी अधिक निराशावादी है। कंपनियों के प्रमुखों का अनुमान है कि सालाना महँगाई दर लगभग 5.3% रहेगी। इस स्थिति को देखते हुए ट्रेडर्स और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि फेडरल रिजर्व साल के अंत से पहले अपनी नीतिगत ब्याज दर में एक और बढ़ोतरी कर सकता है।
जीवन-यापन की बढ़ती लागत राजनीतिक तनाव को भी बढ़ा रही है। लगभग 78% अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि कीमतों में तेजी के लिए ट्रंप प्रशासन की नीतियाँ जिम्मेदार हैं। घरेलू ईंधन बाजार को स्थिर करने और कीमतों के दबाव को कम करने के प्रयास में व्हाइट हाउस ने दूसरे देशों के साथ समझौते करने की कोशिश की है। 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति ने रूस के नेता व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की। इसके बाद दोनों पक्ष रूस से अमेरिका और वैश्विक बाजारों में डीजल ईंधन की आपूर्ति करने पर सहमत हुए।