तीसरी तिमाही की कमजोर GDP वृद्धि और फ्रांस में जारी अशांति के कारण ECB अक्टूबर में मौद्रिक सख्ती पर रोक लगाने की ओर बढ़ रहा है।

ब्लूमबर्ग द्वारा अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा 29 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी नहीं करने की संभावना लगातार बढ़ रही है। इसकी मुख्य वजह यूरो क्षेत्र के देशों में व्यापक आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) का लगातार कमजोर होना है।

ECB के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक गतिविधियों में आई तेज गिरावट है। यूरो क्षेत्र की GDP वृद्धि दर दूसरी तिमाही के 0.6% से घटकर तीसरी तिमाही में केवल 0.2% रह गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के आसपास संघर्ष शुरू होने के बाद यूरोपीय अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती का प्रदर्शन किया था, अब वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की यूरो क्षेत्र की मुख्य अर्थशास्त्री सिमोना डेल्ले चियाए ने चेतावनी दी है कि ECB एक पारंपरिक स्टैगफ्लेशन (Stagflation) की स्थिति में फंसता जा रहा है।

महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और साल के अंत तक 4% तक पहुंच सकती है। वहीं, वित्तीय परिस्थितियां तेजी से सख्त हो रही हैं और लंबे समय तक आर्थिक मंदी (Recession) बने रहने का जोखिम बढ़ रहा है।

10 सितंबर की बैठक में ECB पहले ही अपनी तीनों प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर चुका है, जिससे ये दरें क्रमशः 2.5%, 2.65% और 2.9% हो गई थीं।

हालांकि, इस सप्ताह केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने की उम्मीद है। साथ ही, इस साल की तीसरी मौद्रिक सख्ती (Monetary Tightening) को दिसंबर तक टाला जा सकता है।

यूरो क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में जारी राजनीतिक अस्थिरता भी स्थिति को और खराब कर रही है। बजट को लेकर तीखे राजनीतिक मतभेद और लगातार हो रहे सड़क प्रदर्शनों का सरकारी बॉन्ड और शेयर बाजारों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

ऐसी परिस्थितियों में फ्रैंकफर्ट में बैठे मौद्रिक नीति निर्माताओं को अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना पड़ सकता है। अब उनका ध्यान केवल महंगाई पर नियंत्रण रखने से हटकर कमजोर होती आर्थिक वृद्धि को बचाने पर भी केंद्रित करना होगा, क्योंकि घरेलू मांग (Domestic Demand) लगातार घट रही है।

आसान भाषा में मुख्य बात:

यूरो क्षेत्र की GDP वृद्धि 0.6% से गिरकर 0.2% रह गई है।महंगाई अभी भी ऊंची है और 4% तक पहुंचने की आशंका है।फ्रांस की राजनीतिक अस्थिरता यूरोपीय बाजारों पर दबाव डाल रही है।ECB अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने के बजाय रोक सकता है।दिसंबर में ब्याज दरों में दोबारा बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।

Forex Market के लिहाज से: यह स्थिति यूरो के लिए नकारात्मक हो सकती है, क्योंकि कमजोर GDP और आर्थिक मंदी का जोखिम ECB को ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकने के लिए मजबूर कर सकता है। हालांकि, महंगाई ऊंची रहने पर ECB लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है।