जीवाश्म ईंधन की महंगी खरीद यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर कर रही है।

वैश्विक अस्थिरता के बीच पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) की खरीद तेजी से बढ़ाने वाले यूरोपीय देशों को इसके साथ-साथ बड़े आर्थिक संकटों और झटकों का भी सामना करना पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यह चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के लिए इस स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता स्वच्छ ऊर्जा के विकास में तेजी लाना है, विशेष रूप से पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन में। इससे न केवल जलवायु सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यूरोपीय देशों की ऊर्जा स्वतंत्रता और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर होगी।

हरित ऊर्जा की ओर बदलाव (Green Transition) को जल्द पूरा करने की जरूरत इसलिए और बढ़ गई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) प्रभावी रूप से बंद होने के बाद मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से संकट गहरा गया है। यूरोप के भूमिगत भंडारण केंद्रों में सीमित ऊर्जा भंडार होने के कारण आयातकों को नॉर्वे और अमेरिका से अधिक महंगी ऊर्जा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इसके परिणामस्वरूप, वॉन डेर लेयेन के अनुमान के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से यूरोपीय संघ पर तेल और गैस की लागत में अतिरिक्त 127 अरब यूरो का बोझ पड़ा है। इसका मतलब है कि यूरोपीय संघ को ऊर्जा की वास्तविक आपूर्ति की मात्रा बढ़ाए बिना ही ईंधन के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ी है।

अरबों यूरो का अतिरिक्त खर्च उठाने के बावजूद, यूरोपीय संघ के नेताओं ने रूसी ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि ब्रुसेल्स का रूसी ऊर्जा की खरीद दोबारा शुरू करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि रूसी ईंधन पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य अगले साल के अंत तक हासिल किया जाना चाहिए।