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FX.co ★ 9 जुलाई को किन बातों पर ध्यान दें? शुरुआती ट्रेडर्स के लिए फंडामेंटल इवेंट्स का विश्लेषण

9 जुलाई को किन बातों पर ध्यान दें? शुरुआती ट्रेडर्स के लिए फंडामेंटल इवेंट्स का विश्लेषण

मैक्रोइकोनॉमिक रिपोर्टों का विश्लेषण:

9 जुलाई को किन बातों पर ध्यान दें? शुरुआती ट्रेडर्स के लिए फंडामेंटल इवेंट्स का विश्लेषण

गुरुवार को बहुत कम मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़े जारी होने वाले हैं और उनमें से कोई भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण नहीं है। इसलिए आज भी ट्रेडर्स के पास बाजार में प्रतिक्रिया देने के लिए कोई बड़ा आर्थिक ट्रिगर नहीं होगा। जर्मनी में ट्रेड बैलेंस (व्यापार संतुलन) की रिपोर्ट जारी की जाएगी, जबकि अमेरिका में बेरोजगारी दावों (Unemployment Claims) और नए घरों की बिक्री (New Home Sales) से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित होगी। पिछले कुछ महीनों में बाजार ने मुख्य रूप से महंगाई (Inflation) और नॉनफार्म पेरोल्स (Nonfarm Payrolls) की रिपोर्टों पर ही प्रतिक्रिया दी है। दोनों करेंसी पेअर्स में उतार-चढ़ाव (Volatility) फिलहाल काफी कम बना हुआ है।

फंडामेंटल इवेंट्स का विश्लेषण:

9 जुलाई को किन बातों पर ध्यान दें? शुरुआती ट्रेडर्स के लिए फंडामेंटल इवेंट्स का विश्लेषण

गुरुवार के प्रमुख फंडामेंटल इवेंट्स में फेडरल रिजर्व के प्रतिनिधियों लोरेटा मेस्टर (Loretta Mester) और जॉन विलियम्स (John Williams) के भाषण शामिल हैं। हालांकि, आने वाले महीनों में फेड का रुख मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाओं, तेल की कीमतों और अमेरिकी महंगाई पर निर्भर करेगा। अगली महंगाई (Inflation) रिपोर्ट अगले मंगलवार को जारी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर फेड की मौद्रिक नीति में संभावित बदलावों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। यदि महंगाई में गिरावट आती है, तो वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी कम हो जाएगी।

भू-राजनीतिक स्थिति फिलहाल सशर्त रूप से सकारात्मक (Conditionally Positive) बनी हुई है। ईरान और अमेरिका ने दूरस्थ रूप से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे हैं। इनमें विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम, लेबनान और इज़राइल के बीच युद्ध, तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति शामिल हैं। सैद्धांतिक रूप से बाजार को फिर से पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू होने का डर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह डर अमेरिकी डॉलर में मजबूत तेजी लाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसका कारण यह है कि तेहरान और वॉशिंगटन अब भी शांति की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, बुधवार की घटनाओं ने यह भी दिखाया कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संघर्ष विराम की स्थिति बेहद नाजुक है। बातचीत और समझौता किसी भी समय टूट सकता है।

सामान्य निष्कर्ष:

सप्ताह के दूसरे अंतिम ट्रेडिंग दिन दोनों करेंसी पेअर्स में कारोबार काफी सुस्त रह सकता है, क्योंकि आज भी कोई बड़ा आर्थिक इवेंट निर्धारित नहीं है। यूरो और ब्रिटिश पाउंड दोनों किसी भी दिशा में मूव कर सकते हैं।

  • यूरो के लिए ट्रेडिंग क्षेत्र: 1.1420–1.1432
  • ब्रिटिश पाउंड के लिए ट्रेडिंग क्षेत्र: 1.3380–1.3386

आज बाजार में न तो बहुत तेज़ मूवमेंट और न ही अधिक वोलैटिलिटी की उम्मीद है।

ट्रेडिंग सिस्टम के मूल नियम:

  • किसी सिग्नल की मजबूती इस बात से तय होती है कि बाउंस या ब्रेकआउट बनने में कितना समय लगा। जितना कम समय लगेगा, सिग्नल उतना ही मजबूत माना जाएगा।
  • यदि किसी स्तर पर दो या अधिक ट्रेड गलत (False) सिग्नल के कारण खुल चुके हों, तो उसी स्तर से मिलने वाले बाद के सभी सिग्नलों को नजरअंदाज करना चाहिए।
  • फ्लैट मार्केट में कोई भी करेंसी पेअर कई गलत सिग्नल दे सकता है या फिर कोई सिग्नल नहीं दे सकता। ऐसे समय तकनीकी स्तरों की अनदेखी भी हो सकती है।
  • प्रति घंटे (Hourly) टाइमफ्रेम पर MACD इंडिकेटर के सिग्नल तभी इस्तेमाल करें, जब बाजार में अच्छी वोलैटिलिटी हो और ट्रेंड की पुष्टि ट्रेंड लाइन या चैनल से हो।
  • यदि दो तकनीकी स्तरों के बीच केवल 5 से 20 पिप्स का अंतर हो, तो उन्हें एक सपोर्ट या रेजिस्टेंस ज़ोन माना जाना चाहिए।
  • यदि कीमत ट्रेड की दिशा में 15 पिप्स बढ़ जाती है, तो स्टॉप लॉस (Stop Loss) को ब्रेक-ईवन पर सेट कर देना चाहिए।

चार्ट पर क्या दर्शाया गया है?

  • सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर वे क्षेत्र हैं जहां से खरीद (Buy) या बिक्री (Sell) की पोजीशन खोली जा सकती है या जहां से ट्रेडिंग सिग्नल प्राप्त हो सकते हैं।
  • लाल रेखाएं ट्रेंड लाइन या चैनल को दर्शाती हैं, जो मौजूदा ट्रेंड और ट्रेडिंग की संभावित दिशा बताते हैं।
  • MACD इंडिकेटर (14,22,3) — जिसमें हिस्टोग्राम और सिग्नल लाइन शामिल हैं — एक सहायक इंडिकेटर है, जिसे अतिरिक्त ट्रेडिंग सिग्नल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण जानकारी:

न्यूज़ कैलेंडर में शामिल महत्वपूर्ण भाषण और आर्थिक रिपोर्टें करेंसी पेअर्स की चाल पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए इनके जारी होने के समय बेहद सावधानी से ट्रेड करना चाहिए या तेज़ उलटफेर के जोखिम से बचने के लिए बाजार से बाहर निकल जाना चाहिए।

फॉरेक्स बाजार में नए ट्रेडर्स को यह याद रखना चाहिए कि हर ट्रेड लाभदायक नहीं होता। एक स्पष्ट ट्रेडिंग रणनीति विकसित करना और मनी मैनेजमेंट के नियमों का पालन करना ही लंबे समय में सफल ट्रेडिंग की कुंजी है।

*यहाँ दिया गया बाजार का विश्लेषण आपकी जागरूकता को बढ़ाने के लिए है, यह ट्रेड करने का निर्देश नहीं है
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