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FX.co ★ GBP/USD का अवलोकन: पाउंड को घबराने की कोई वजह नहीं दिख रही।

GBP/USD का अवलोकन: पाउंड को घबराने की कोई वजह नहीं दिख रही।

GBP/USD का अवलोकन: पाउंड को घबराने की कोई वजह नहीं दिख रही।

पिछले दो सप्ताहों में GBP/USD मुद्रा जोड़ी में लगभग 300 पिप्स की बढ़त दर्ज की गई है। हमारी हालिया समीक्षाओं में हमने लगातार यह कहा था कि पिछली गिरावट तर्कसंगत नहीं थी और इसके बाद आई तेजी दो महत्वपूर्ण कारणों से प्रेरित रही।

पहला कारण यह है कि बाजार में संतुलन (Correction) लौट रहा है, क्योंकि हाल के महीनों में ब्रिटिश पाउंड में इतनी बड़ी गिरावट के लिए कोई ठोस आधार नहीं था। दूसरा कारण तकनीकी (Technical) है, क्योंकि साप्ताहिक (Weekly) टाइमफ्रेम पर लगभग एक वर्ष से एक साइडवेज़ चैनल (Sideways Channel) बना हुआ है। इसलिए, इसकी निचली सीमा का परीक्षण करने के बाद कीमत अब ऊपरी सीमा की ओर बढ़ने लगी है। इसके अलावा, फिबोनाची (Fibonacci) के 38.2% स्तर का भी उल्लेख करना आवश्यक है। यूरो और ब्रिटिश पाउंड—दोनों में लगभग 38.2% का सुधार (Correction) देखा गया। अल्पकालिक चालें भले ही कुछ अलग रही हों, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से दोनों की दिशा लगभग समान रही है।

इस प्रकार, दोनों प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में आने वाले कुछ वर्षों के लिए तेजी (Bullish) की संभावना बनी हुई है। अगले कुछ सप्ताहों में 1.3700 के स्तर तक बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, जहां साइडवेज़ चैनल की ऊपरी सीमा स्थित है। हालांकि सवाल यह है कि कौन-से कारक ब्रिटिश पाउंड को यहां से और 300 पिप्स ऊपर जाने में मदद करेंगे या उसे रोक सकते हैं?

भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाक्रम

हमारी राय में, अब बाजार हर छोटे भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया नहीं देगा। वार्ता के एक और दौर की विफलता, महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति का अभाव, युद्धविराम का उल्लंघन या नए मिसाइल हमले—इन घटनाओं का अब बाजार पर पहले जैसा असर नहीं पड़ रहा है। ट्रेडर्स केवल तभी बड़ी प्रतिक्रिया दे सकते हैं जब युद्ध पूरी तरह फिर से शुरू हो जाए या फिर दीर्घकालिक और स्थायी शांति स्थापित हो जाए।

केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति (Monetary Policy)

फिलहाल Bank of England और Federal Reserve (Fed) की मौद्रिक नीति को लेकर जवाबों से अधिक सवाल मौजूद हैं।

फेड ब्याज दरें बढ़ाने के लिए तैयार दिखाई देता है, लेकिन वह जल्दबाज़ी नहीं कर रहा है। उसका मानना है कि तेल की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई (Inflation) धीमी पड़ सकती है। अगले मंगलवार जून महीने का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI) जारी होगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि फेड की यह उम्मीद सही साबित होती है या नहीं।

दूसरी ओर, Bank of England फिलहाल ब्याज दर बढ़ाने की तैयारी में नहीं है, हालांकि उसे उम्मीद है कि 2026 की दूसरी छमाही में महंगाई तेज होगी। इसलिए अगली बैठक में दोनों में से किसी भी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना नहीं है। ऐसे में डॉलर और पाउंड दोनों लगभग समान स्थिति में हैं।

व्यापक आर्थिक आंकड़े (Macroeconomic Data)

वर्ष 2026 में व्यापक आर्थिक आंकड़ों का ट्रेडर्स की धारणा पर अपेक्षाकृत सीमित प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए अगली महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट आने पर भी बाजार में बहुत बड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हाल के सप्ताहों में ब्रिटिश पाउंड की वोलैटिलिटी (Volatility) भी काफी कम रही है, जो यह दर्शाती है कि फिलहाल बाजार बहुत आक्रामक तरीके से ट्रेडिंग नहीं कर रहा है।

याद रखें कि फ्लैट (Flat) या साइडवेज़ मार्केट वह अवधि होती है, जब बड़े निवेशक भविष्य की चाल के लिए अपनी पोज़िशन जमा (Accumulation) या वितरित (Distribution) करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो हर फ्लैट किसी नए ट्रेंड से पहले की शांति होती है।

तो अगला बड़ा ट्रेंड किस दिशा में हो सकता है? हमारी राय में, इसकी संभावना ऊपर की ओर अधिक है। अमेरिकी डॉलर के पास दीर्घकालिक मजबूती के पर्याप्त आधार नहीं हैं, जबकि ब्रिटिश पाउंड लगभग 16 वर्षों से दीर्घकालिक गिरावट के रुझान में रहा है। इसलिए हमारा मानना है कि मौजूदा तेजी केवल मौलिक कारणों से ही नहीं, बल्कि तकनीकी आधार पर भी आगे जारी रह सकती है।

GBP/USD का अवलोकन: पाउंड को घबराने की कोई वजह नहीं दिख रही।

पिछले 5 ट्रेडिंग दिनों में GBP/USD मुद्रा जोड़ी की औसत वोलैटिलिटी (Volatility) 64 पिप्स रही है। पाउंड/डॉलर जोड़ी के लिए इसे "मध्यम से कम (Medium-Low)" वोलैटिलिटी माना जाता है। सोमवार, 13 जुलाई को कीमत के 1.3335 और 1.3463 के बीच रहने की संभावना है। लीनियर रिग्रेशन (Linear Regression) चैनल की ऊपरी रेखा नीचे की ओर संकेत कर रही है, जो मौजूदा डाउनट्रेंड को दर्शाती है।

CCI (Commodity Channel Index) इंडिकेटर दो बार ओवरसोल्ड (Oversold) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और दो बुलिश डाइवर्जेंस (Bullish Divergence) बना चुका है, जिससे डाउनट्रेंड के समाप्त होने का संकेत मिला था। हालांकि, अब इसने एक नया बेयरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence) भी बना लिया है।

निकटतम सपोर्ट स्तर (Support Levels)

S1: 1.3367
S2: 1.3306
S3: 1.3245

निकटतम रेजिस्टेंस स्तर (Resistance Levels)

R1: 1.3428
R2: 1.3489
R3: 1.3550

ट्रेडिंग सिफारिशें (Trading Recommendations)

GBP/USD मुद्रा जोड़ी फिलहाल अपने डाउनट्रेंड को बनाए हुए है।

डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती रहेंगी, इसलिए दीर्घकाल में अमेरिकी डॉलर में मजबूत बढ़त की उम्मीद नहीं की जा रही है। हालांकि, 2026 डॉलर के लिए भू-राजनीतिक घटनाओं और हाल ही में फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा प्रमुख ब्याज दर बढ़ाने की तत्परता के कारण काफी सकारात्मक साबित हुआ है।

इसके बावजूद, साप्ताहिक (Weekly) टाइमफ्रेम पर 1.3150 और 1.3780 के बीच एक फ्लैट (Sideways) क्षेत्र बना हुआ है, जो चार वर्षों से चले आ रहे अपट्रेंड के भीतर स्थित है।

  • यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) के ऊपर बनी रहती है, तो 1.3428 और 1.3463 के लक्ष्य के साथ लॉन्ग (Buy) पोज़िशन पर विचार किया जा सकता है।
  • यदि कीमत मूविंग एवरेज से नीचे रहती है, तो 1.3245 के लक्ष्य के साथ शॉर्ट (Sell) ट्रेड लिए जा सकते हैं।

चार्ट में प्रयुक्त संकेतकों का अर्थ

  • Linear Regression Channels: ये मौजूदा ट्रेंड की दिशा निर्धारित करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में हों, तो इसका अर्थ है कि ट्रेंड मजबूत है।
  • Moving Average Line (20,0, Smoothed): यह अल्पकालिक ट्रेंड और ट्रेडिंग की संभावित दिशा को दर्शाती है।
  • Murray Levels: ये संभावित लक्ष्य (Target) और करेक्शन (Correction) के स्तर होते हैं।
  • Volatility Levels (लाल रेखाएं): वर्तमान वोलैटिलिटी के आधार पर आने वाले दिनों में कीमत जिस दायरे में रह सकती है, उसे दर्शाती हैं।
  • CCI (Commodity Channel Index):
    • -250 से नीचे जाने पर बाजार ओवरसोल्ड (Oversold) माना जाता है।
    • +250 से ऊपर जाने पर बाजार ओवरबॉट (Overbought) माना जाता है।
    दोनों ही स्थितियां इस बात का संकेत हो सकती हैं कि ट्रेंड जल्द ही विपरीत दिशा में बदल सकता है।
*यहाँ दिया गया बाजार का विश्लेषण आपकी जागरूकता को बढ़ाने के लिए है, यह ट्रेड करने का निर्देश नहीं है
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