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FX.co ★ GBP/USD का अवलोकन: 22 जुलाई — पाउंड में उतार-चढ़ाव जारी, अब महंगाई (Inflation) के आंकड़ों का इंतजार

GBP/USD का अवलोकन: 22 जुलाई — पाउंड में उतार-चढ़ाव जारी, अब महंगाई (Inflation) के आंकड़ों का इंतजार

GBP/USD का अवलोकन: 22 जुलाई — पाउंड में उतार-चढ़ाव जारी, अब महंगाई (Inflation) के आंकड़ों का इंतजार

मंगलवार को GBP/USD मुद्रा जोड़ी में गिरावट का रुख जारी रहा। फिलहाल विदेशी मुद्रा बाजार की स्थिति काफी दिलचस्प हो गई है।

एक ओर, यूरो पिछले चार सप्ताह से लगभग एक सीमित दायरे (Flat) में कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रिटिश पाउंड पहले लगभग 400 पिप्स तक तेज़ी से बढ़ा और अब लगभग उसी गति से नीचे आ रहा है।

हालांकि, यदि ध्यान से देखा जाए, तो इस समय ब्रिटिश पाउंड की चाल यूरो की तुलना में अधिक तार्किक दिखाई देती है।

कुछ लोग कह सकते हैं कि पाउंड की तेजी के पीछे कोई ठोस कारण नहीं था। औपचारिक रूप से यह बात सही है। लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि एक महीने पहले अमेरिकी डॉलर की मजबूती के पीछे भी कोई स्पष्ट कारण नहीं था।

उस समय फेडरल रिजर्व ने अभी ब्याज दरें नहीं बढ़ाई थीं, फिर भी बाजार तेजी से डॉलर खरीद रहा था।

भू-राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ तो भी डॉलर मजबूत हुआ, और जब वही संघर्ष समाप्त हुआ या अस्थायी रूप से शांत हुआ, तब भी डॉलर मजबूत होता रहा। यह स्थिति पूरी तरह तार्किक नहीं कही जा सकती।

इसलिए, ब्रिटिश पाउंड में हाल की तेजी को उसके उचित मूल्य (Fair Value) की वापसी और साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर बने क्षैतिज चैनल (Horizontal Channel) के भीतर एक स्वाभाविक तकनीकी चाल माना जा सकता है।

ध्यान रहे कि इस मुद्रा जोड़ी ने पहले इस चैनल की निचली सीमा का परीक्षण किया था, इसलिए इसके बाद ऊपरी सीमा की ओर बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा था।

हाल के दिनों में पाउंड में आई गिरावट को केवल एक सामान्य तकनीकी करेक्शन माना जा सकता है, जो तेज़ी के बाद अक्सर देखने को मिलता है।

CCI (Commodity Channel Index) संकेतक ने पहले बेयरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence) बनाया और उसके बाद ओवरबॉट (Overbought) क्षेत्र में प्रवेश किया।

दूसरे शब्दों में, इस संकेतक ने संभावित गिरावट के बारे में पहले ही दो स्पष्ट चेतावनियां दे दी थीं।

आज सुबह ब्रिटेन की जून महीने की महंगाई (Inflation) के आंकड़े जारी होंगे। इन आंकड़ों से यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) अपनी आने वाली बैठकों में किस प्रकार के फैसले ले सकता है।

गौरतलब है कि सितंबर पिछले वर्ष से ब्रिटेन में महंगाई दर 3.8% से घटकर 2.8% हो चुकी है और आज यह 2.6% तक आने की संभावना है।

यदि ऐसा होता है, तो यह संकेत होगा कि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था ने ऊर्जा संकट का अपेक्षाकृत कम असर झेला है और कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है।

ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को मौद्रिक नीति और अधिक सख्त (Tighten) करने की आवश्यकता क्यों होगी?

इसी कारण आज ब्रिटिश पाउंड में गिरावट का दबाव जारी रह सकता है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली के अनुसार 2026 की दूसरी छमाही में महंगाई फिर से बढ़ सकती है, जबकि अमेरिका में जुलाई के अंत तक महंगाई के और धीमी होने की उम्मीद की जा रही है।

सरल शब्दों में कहें तो मौजूदा परिस्थितियों में केवल एक महंगाई रिपोर्ट पूरे आर्थिक परिदृश्य को स्पष्ट नहीं कर सकती।

महंगाई काफी हद तक तेल की कीमतों पर निर्भर करती है, और तेल की कीमतें भू-राजनीतिक घटनाक्रम से प्रभावित होती हैं।

जून में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थी, जबकि जुलाई में यह बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।

अगस्त में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका अनुमान लगाना कठिन है।

इसलिए ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ में महंगाई भी तेल की कीमतों की तरह उतार-चढ़ाव का सामना कर सकती है, क्योंकि तेल बाजार लगातार मध्य-पूर्व की बदलती परिस्थितियों से प्रभावित हो रहा है।

हमारा मानना है कि आने वाले दिनों में ब्रिटिश पाउंड में करेक्शन जारी रह सकता है, लेकिन यह हमेशा नहीं रहेगा।

साप्ताहिक चार्ट पर बने क्षैतिज चैनल की ऊपरी सीमा अभी तक हासिल नहीं हुई है।

इसलिए, करेक्शन पूरा होने के बाद पाउंड में फिर से तेजी आने और कीमत के 1.37–1.38 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

GBP/USD का अवलोकन: 22 जुलाई — पाउंड में उतार-चढ़ाव जारी, अब महंगाई (Inflation) के आंकड़ों का इंतजार

पिछले 5 ट्रेडिंग दिनों में GBP/USD मुद्रा जोड़ी की औसत अस्थिरता (Volatility) 97 पिप्स रही है। पाउंड/डॉलर जोड़ी के लिए इसे "मध्यम (Average)" अस्थिरता माना जाता है।

बुधवार, 22 जुलाई को इस मुद्रा जोड़ी के 1.3278 से 1.3472 के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

लिनियर रिग्रेशन (Linear Regression) का ऊपरी चैनल नीचे की ओर संकेत कर रहा है, जो गिरावट वाले ट्रेंड (Downtrend) को दर्शाता है।

वहीं, CCI (Commodity Channel Index) संकेतक ने बेयरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence) बनाया है और ओवरबॉट (Overbought) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है, जो इस बात का संकेत है कि नीचे की ओर एक तकनीकी करेक्शन शुरू हो चुका है।

निकटतम सपोर्ट स्तर (Support Levels)

  • S1: 1.3367
  • S2: 1.3306
  • S3: 1.3245

निकटतम रेजिस्टेंस स्तर (Resistance Levels)

  • R1: 1.3428
  • R2: 1.3489
  • R3: 1.3550

ट्रेडिंग सुझाव

GBP/USD मुद्रा जोड़ी फिलहाल दीर्घकालिक तेजी (Uptrend) में बनी हुई है।

विश्लेषण के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाए रखेंगी, इसलिए अमेरिकी डॉलर में लंबे समय तक मजबूत तेजी की उम्मीद नहीं की जा रही है।

हालांकि, 2026 फिलहाल भू-राजनीतिक कारणों से डॉलर के लिए बेहद सकारात्मक साबित हुआ है, लेकिन हर अनुकूल परिस्थिति हमेशा नहीं रहती।

साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर 1.3150 से 1.3780 के बीच बाजार अभी भी रेंज (Flat) में बना हुआ है, जबकि व्यापक दृष्टि से पिछले चार वर्षों का मुख्य ट्रेंड तेजी (Uptrend) का है।

इसी आधार पर मध्यम अवधि में ब्रिटिश पाउंड में फिर से तेजी जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

  • यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) के ऊपर बनी रहती है, तो लॉन्ग (Buy) पोज़िशन पर 1.3489 और 1.3550 के लक्ष्य के साथ विचार किया जा सकता है।
  • यदि कीमत मूविंग एवरेज के नीचे रहती है, तो शॉर्ट (Sell) पोज़िशन के लिए 1.3306 और 1.3278 के लक्ष्य उपयुक्त माने जा सकते हैं।

चार्ट में उपयोग किए गए संकेतकों का अर्थ

  • लिनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channels):
    ये वर्तमान ट्रेंड की दिशा बताने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में हों, तो इसका अर्थ है कि ट्रेंड मजबूत है।
  • मूविंग एवरेज (Moving Average – सेटिंग: 20,0, Smoothed):
    यह अल्पकालिक ट्रेंड की दिशा बताता है और वर्तमान में किस दिशा में ट्रेडिंग करनी चाहिए, इसका संकेत देता है।
  • मरे लेवल्स (Murray Levels):
    ये संभावित लक्ष्य (Target) और करेक्शन (Correction) के महत्वपूर्ण स्तर होते हैं।
  • वोलैटिलिटी लेवल्स (लाल रेखाएं):
    ये वर्तमान अस्थिरता के आधार पर अगले ट्रेडिंग दिन के संभावित मूल्य दायरे (Price Range) का संकेत देते हैं।
  • CCI (Commodity Channel Index):
    जब CCI -250 से नीचे जाता है, तो यह ओवरसोल्ड (Oversold) स्थिति का संकेत देता है, जबकि +250 से ऊपर जाने पर ओवरबॉट (Overbought) स्थिति मानी जाती है। दोनों ही स्थितियां अक्सर विपरीत दिशा में ट्रेंड बदलने (Trend Reversal) की संभावना का संकेत देती हैं।
*यहाँ दिया गया बाजार का विश्लेषण आपकी जागरूकता को बढ़ाने के लिए है, यह ट्रेड करने का निर्देश नहीं है
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