मंगलवार का ट्रेड विश्लेषण:
EUR/USD का 1 घंटे (1H) का चार्ट।

EUR/USD करेंसी पेयर ने मंगलवार को पूरे दिन सीमित दायरे (Sideways) में कारोबार किया। वहीं, अमेरिका की एकमात्र अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट JOLTS भी बाजार में कोई हलचल पैदा करने में नाकाम रही, जैसा कि पहले से उम्मीद थी।
गौरतलब है कि सप्ताह की शुरुआत में ही बाजार का ध्यान अमेरिकी चुनावों पर केंद्रित हो गया था और रात के दौरान अमेरिका से मतदान के शुरुआती नतीजे आने शुरू हो गए थे।
ताजा अपडेट के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट की 45 सीटें जीत ली थीं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को केवल 35 सीटें मिली थीं। वहीं, प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में डेमोक्रेट्स ने 80 सीटें जीती थीं, जबकि रिपब्लिकन को केवल 42 सीटें मिली थीं।
हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर कोई बड़ा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि ये शुरुआती नतीजे हैं। लेकिन इस स्तर पर भी कहा जा सकता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की निर्णायक जीत की संभावना काफी अधिक है।
बाजार ने शुरुआती नतीजों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी डॉलर की लंबे समय से प्रतीक्षित बिकवाली शुरू हो गई। पिछले कुछ महीनों में लगभग हर खबर के आधार पर डॉलर मजबूत हो रहा था।
हमारा मानना अब भी यही है कि मौजूदा रुझान में बदलाव आना चाहिए और साल के अंत तक यूरो अपनी स्थिति में काफी सुधार कर सकता है।
EUR/USD का 5 मिनट (5M) का चार्ट।

मंगलवार को 5 मिनट (5M) के टाइमफ्रेम पर तीन सेल सिग्नल बने। कीमत ने 1.1198–1.1218 के स्तर से तीन बार उछाल लिया, लेकिन कोई बड़ी गिरावट दर्ज करने में नाकाम रही, क्योंकि उस दिन बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) लगभग न के बराबर था।
रात के दौरान एक बाय सिग्नल बना, जब कीमत 1.1198–1.1218 के स्तर से ऊपर निकल गई। इससे शुरुआती ट्रेडर्स को ट्रेड करने का संभावित अवसर मिला। बुधवार को और सप्ताह के अंत तक बाजार में काफी अधिक उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है।
बुधवार को ट्रेडिंग कैसे करें:
घंटे (1H) के टाइमफ्रेम पर EUR/USD में गिरावट का रुझान (Downtrend) बना हुआ है। यह एक स्थापित ट्रेंड है और कीमत अभी भी 1.1114 और 1.1267 के बीच सीमित दायरे में कारोबार कर रही है।
पिछले कुछ हफ्तों में यूरो कोई उल्लेखनीय सुधार (Correction) करने में सफल नहीं हुआ है, लेकिन ऊपर की ओर नया ट्रेंड शुरू होने की संभावना अभी भी बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों की सभी घटनाओं को देखते हुए यूरो में इतनी तेज गिरावट की उम्मीद नहीं थी। फिलहाल अमेरिकी डॉलर काफी ज्यादा ओवरबॉट (Overbought) स्थिति में है, जबकि यूरो को मजबूत बनाने वाले कई महत्वपूर्ण कारकों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
बुधवार को शुरुआती ट्रेडर्स निम्नलिखित परिस्थितियों में ट्रेड करने पर विचार कर सकते हैं:
- सेल ट्रेड (Sell Trade): यदि कीमत 1.1267–1.1275 के स्तर से उछलकर नीचे आती है, तो 1.1198–1.1218 के लक्ष्य के साथ सेल पोजीशन पर विचार किया जा सकता है।
- बाय ट्रेड (Buy Trade): यदि कीमत 1.1267–1.1275 के स्तर से ऊपर क्लोज होती है, तो 1.1366–1.1377 के लक्ष्य के साथ बाय ट्रेड पर विचार किया जा सकता है।
5 मिनट (5M) के टाइमफ्रेम पर निम्नलिखित स्तरों पर ध्यान देना चाहिए:
- 1.1011
- 1.1104–1.1114
- 1.1198–1.1218
- 1.1267–1.1275
- 1.1366–1.1377
- 1.1461–1.1474
- 1.1527–1.1531
- 1.1584–1.1594
- 1.1655–1.1665
बुधवार को कई महत्वपूर्ण घटनाएं निर्धारित हैं। इनमें अमेरिकी चुनाव के नतीजे, ADP अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट, ISM बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स और यूरो क्षेत्र की महंगाई रिपोर्ट शामिल हैं। आज बाजार में उतार-चढ़ाव काफी अधिक हो सकता है।
ट्रेडिंग सिस्टम के प्रमुख नियम:
1. किसी सिग्नल की मजबूती इस बात से तय होती है कि उसे बनने में कितना समय लगा (किसी स्तर से उछाल या उस स्तर को तोड़ना)। जितना कम समय लगेगा, सिग्नल उतना ही मजबूत माना जाएगा।
2. यदि किसी विशेष स्तर के आसपास गलत सिग्नल के आधार पर दो या उससे अधिक ट्रेड खोले जा चुके हैं, तो उस स्तर से मिलने वाले सभी अगले सिग्नलों को नजरअंदाज कर देना चाहिए।
3. साइडवेज मार्केट में किसी भी करेंसी पेयर से कई गलत सिग्नल मिल सकते हैं या एक भी सिग्नल नहीं मिल सकता। कीमत तकनीकी स्तरों का पालन भी नहीं कर सकती है।
4. एक घंटे के टाइमफ्रेम पर MACD सिग्नल पर ट्रेडिंग तभी करनी चाहिए, जब बाजार में पर्याप्त वोलैटिलिटी हो और ट्रेंड की पुष्टि ट्रेंडलाइन या ट्रेंड चैनल से हो रही हो।
5. यदि दो स्तर एक-दूसरे के बहुत करीब (5–20 पॉइंट की दूरी पर) हों, तो उन्हें अलग-अलग स्तरों के बजाय एक सपोर्ट या रेजिस्टेंस क्षेत्र के रूप में देखना चाहिए।
6. जब कीमत ट्रेड के अनुकूल दिशा में 15 पॉइंट आगे बढ़ जाए, तो स्टॉप लॉस (Stop Loss) को ब्रेकईवन (Breakeven) पर ले आना चाहिए, ताकि ट्रेड में नुकसान का जोखिम कम हो सके।
चार्ट क्या दर्शाते हैं:
सपोर्ट और रेजिस्टेंस प्राइस लेवल (क्षेत्र): ये ऐसे स्तर होते हैं, जिनका इस्तेमाल बाय या सेल ट्रेड के लक्ष्य निर्धारित करने या ट्रेडिंग सिग्नल प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
लाल रेखाएं (Red Lines): ये चैनल या ट्रेंडलाइन को दर्शाती हैं, जो मौजूदा ट्रेंड की दिशा और ट्रेडिंग के लिए पसंदीदा दिशा बताती हैं।
MACD इंडिकेटर (14, 22, 3): इसमें एक हिस्टोग्राम और एक सिग्नल लाइन होती है। यह एक सहायक इंडिकेटर है, जिसका इस्तेमाल ट्रेडिंग सिग्नल प्राप्त करने के लिए भी किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण भाषण और आर्थिक रिपोर्ट: आर्थिक कैलेंडर में सूचीबद्ध महत्वपूर्ण भाषणों और आर्थिक रिपोर्टों का करेंसी पेयर की कीमतों पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इन रिपोर्टों के जारी होने के समय बेहद सावधानी से ट्रेडिंग करनी चाहिए। अचानक कीमत के विपरीत दिशा में मुड़ने के जोखिम से बचने के लिए ट्रेडिंग से बाहर निकलना या अपनी पोजीशन बंद करना भी एक विकल्प है।
शुरुआती फॉरेक्स ट्रेडर्स को याद रखना चाहिए कि हर ट्रेड में मुनाफा होना संभव नहीं है। लंबे समय तक ट्रेडिंग में सफल रहने के लिए एक स्पष्ट ट्रेडिंग रणनीति विकसित करना और सही मनी मैनेजमेंट (Money Management) लागू करना बेहद जरूरी है।
