
चीन के अधिकारियों ने वॉशिंगटन के उस फैसले पर कड़ी नाराज़गी जताई है, जिसके तहत कई प्रमुख चीनी कंपनियों को पेंटागन की सूची में शामिल किया गया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका से मांग की है कि वह उन कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को तुरंत हटाए, जिन पर अमेरिकी रक्षा विभाग को बीजिंग की सैन्य क्षमताओं का समर्थन करने का संदेह है।
इस अद्यतन सूची में तकनीकी दिग्गज अलीबाबा और बायडू के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता BYD और NIO भी शामिल हैं। बाद में इस सूची का विस्तार करते हुए सौर पैनल निर्माता ट्रिना सोलर और जेए सोलर टेक्नोलॉजी को भी इसमें जोड़ा गया। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका राष्ट्रीय कंपनियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित नहीं करता और रचनात्मक संवाद की राह पर वापस नहीं लौटता, तो चीन जवाबी कदम उठाने के लिए तैयार है।
यह नया तनाव उस मुलाकात के केवल एक महीने बाद सामने आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग ने बीजिंग में बैठक की थी। चीनी पक्ष के अनुसार, पेंटागन की हालिया कार्रवाइयाँ दोनों नेताओं के बीच हुए उन समझौतों को सीधे तौर पर कमजोर करती हैं, जिनका उद्देश्य नाज़ुक व्यापारिक युद्धविराम को बनाए रखना था।
अमेरिकी कानून रक्षा विभाग को इस सूची में शामिल संस्थाओं के साथ सीधे अनुबंध करने से सख्ती से रोकता है। इनके उत्पादों और सेवाओं की तीसरे पक्ष के माध्यम से खरीद पर भी प्रतिबंध 2027 से लागू हो जाएगा। चीन की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल और आईटी कंपनियों पर बढ़ता दबाव एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि तकनीकी नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार जारी है।
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