
अमेरिका में महंगाई (Inflation) अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, लेकिन तेल की कीमतों में संभावित गिरावट से मुद्रास्फीति का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है। यह बात न्यूयॉर्क फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष जॉन विलियम्स (John Williams) ने कही।
उन्होंने बताया कि तेल की कीमतें अब फरवरी में ईरान से जुड़े संघर्ष से पहले के स्तर पर लौट आई हैं। उस समय हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावी अवरोध के कारण तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया था। यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) के लगभग 20% वैश्विक शिपमेंट का प्रमुख मार्ग है। पिछले महीने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, हालांकि जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का मुद्दा अभी भी अंतिम समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
जॉन विलियम्स ने कहा कि स्पॉट और फ्यूचर्स दोनों बाजारों में ऊर्जा की कीमतों में लगातार गिरावट निकट भविष्य में महंगाई कम होने की उम्मीद को मजबूत करती है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस रुझान का ब्याज दरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसके बजाय उन्होंने कहा कि मौजूदा मौद्रिक नीति (Monetary Policy) ऐसी स्थिति में है कि वह फेडरल रिज़र्व के दोहरे उद्देश्य—मूल्य स्थिरता (Price Stability) और अधिकतम रोजगार (Maximum Employment)—को हासिल करने के लिए उपयुक्त है।
जून में हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में बरकरार रखा गया था। हालांकि, कई अधिकारियों ने संकेत दिया था कि साल के अंत तक उधारी की लागत (Borrowing Costs) में और बढ़ोतरी हो सकती है। इस बैठक के कार्यवृत्त (Minutes) 8 जुलाई को जारी किए गए थे।
फेडरल रिज़र्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श (Kevin Warsh) पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्रीय बैंक अब भविष्य में ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार को पहले से संकेत (Forward Guidance) नहीं देगा। जॉन विलियम्स ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक को आने वाले महीनों में आर्थिक परिस्थितियों पर नज़र रखनी चाहिए और उसी के अनुसार निर्णय लेने चाहिए। उनके अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है और श्रम बाजार (Labor Market) भी काफी हद तक स्थिर हो चुका है।
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