
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी यूरोपीय संघ (EU) के साथ करीबी संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और कनाडा को यूरोपीय संघ में अभूतपूर्व “एसोसिएट मेंबर” (सहयोगी सदस्य) का दर्जा देने की योजना पर विचार कर रहे हैं। Wall Street Journal ने ओटावा और ब्रुसेल्स के जानकार राजनयिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। प्रस्तावित साझेदारी का मतलब पूर्ण सदस्यता या कनाडा की संप्रभुता छोड़ना नहीं होगा। एसोसिएट सदस्यता में संस्थागत सीमाएं होंगी, जिनमें पूरे यूरोप से जुड़े निर्णयों में निर्णायक वोट का अधिकार न होना भी शामिल है। हालांकि, EU अधिकारी, जो परंपरागत रूप से सदस्यता के नियमों में बदलाव का विरोध करते रहे हैं, इस बार अमेरिका के उत्तरी पड़ोसी के लिए एक विशेष दर्जा बनाने को लेकर खुले रुख का संकेत दे रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कनाडाई प्रधानमंत्री प्रमुख EU नेताओं के साथ नियमित बातचीत कर रहे हैं, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी शामिल हैं। बातचीत का एक प्रमुख मुद्दा कनाडाई नागरिकों को EU देशों में वीज़ा-मुक्त रहने और काम करने का अधिकार देने का है। प्रवासन से जुड़ी रियायतों के अलावा, दोनों पक्ष बड़े पैमाने पर संयुक्त बुनियादी ढांचा और डिजिटल परियोजनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। इनमें अटलांटिक महासागर के नीचे संचार केबल बिछाना, एकीकृत डेटा सेंटर और क्लाउड सुविधाएं बनाना, संयुक्त उपग्रह नेटवर्क तैनात करना और कनाडाई गैस व तेल की बड़े पैमाने पर यूरोपीय बंदरगाहों तक आपूर्ति के लिए समुद्री बुनियादी ढांचा विकसित करना शामिल है।
ओटावा का ब्रुसेल्स की ओर यह भूराजनीतिक और आर्थिक रुख डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ बढ़ते टैरिफ विवाद से प्रेरित है। वॉशिंगटन की संरक्षणवादी नीतियां और दोनों देशों के बीच व्यापार पर लगाए गए 50% के पारस्परिक व्यापार अवरोध कनाडाई अधिकारियों को तत्काल वैकल्पिक बाजार तलाशने और उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप से बाहर रणनीतिक साझेदारों के साथ दीर्घकालिक संस्थागत गठबंधन बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।