
JPMorgan Chase के विश्लेषकों ने आधिकारिक रूप से कच्चे तेल की कीमतों का बेस प्राइस फोरकास्ट प्रकाशित करना बंद कर दिया है। अमेरिका के सबसे बड़े बैंकों में से एक JPMorgan ने माना है कि प्रति बैरल तेल की कीमत का अनुमान लगाने के लिए आर्थिक मॉडल अब प्रभावी नहीं हैं, क्योंकि नीति-निर्माताओं ने कथित तौर पर किसी भी तरह की “रेड लाइन” को छोड़ दिया है।
एक रिसर्च नोट में विश्लेषकों ने अमेरिका-ईरान संघर्ष की अनिश्चितता पर चिंता जताई। वॉल स्ट्रीट को शुरुआत में विश्वास था कि अमेरिकी प्रशासन कुछ निश्चित आर्थिक दबाव-बिंदुओं के बाद कार्रवाई करेगा। माना गया था कि जब तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली जाएगी, पेट्रोल 5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच जाएगा, महंगाई 4% हो जाएगी या 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5% से ऊपर चली जाएगी, तब वॉशिंगटन को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए किसी समझौते की ओर बढ़ना पड़ेगा।
लेकिन छह महीने बाद ये सभी सीमाएं पार हो चुकी हैं और फिर भी कोई स्पष्ट बाहर निकलने की रणनीति (Exit Strategy) सामने नहीं आई है।
अब बाजार की गणना वास्तविक परिस्थितियों से अलग होती दिखाई दे रही है। मौलिक मांग और आपूर्ति के आधार पर देखें तो एक बैरल तेल की कीमत लगभग 90 डॉलर होनी चाहिए। लेकिन Brent फ्यूचर्स लगभग 106 डॉलर पर कारोबार कर रहे हैं। यह अंतर संकेत देता है कि ट्रेडर्स पहले ही इस जोखिम को कीमतों में शामिल कर चुके हैं कि अचानक लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन की तेल आपूर्ति बाजार से गायब हो सकती है।
भूराजनीतिक जोखिम भी बढ़ रहे हैं। हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब क्षेत्र में जहाजों के आवागमन को खतरे में डाल रहे हैं। सऊदी अरब की East–West पाइपलाइन पर हमले से एक वैकल्पिक निर्यात मार्ग बाधित हुआ है। वहीं, यूक्रेन लगातार रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बना रहा है।
इन परिस्थितियों के बीच अमेरिका और ईरान इस समस्या से निपटने के लिए तैयार दिखाई नहीं दे रहे हैं और जून में हुआ युद्धविराम भी विफल हो चुका है।
JPMorgan के विश्लेषकों ने अपने नोट का अंत एक गंभीर और अनुत्तरित सवाल के साथ किया:
अगर तेल की ये अस्थायी आपूर्ति बाधाएं स्थायी हो जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?
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