
IMF की मुख्य अर्थशास्त्री सिल्वाना टेनरेरो ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने लगातार कई झटकों का उल्लेखनीय रूप से सामना किया है, लेकिन अब उसकी आर्थिक सुरक्षा के लिए उपलब्ध गुंजाइश तेजी से कम हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि देशों को संकट के दौरान तात्कालिक उपाय करने के बजाय योजनाबद्ध आर्थिक सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए सरकारों को अपनी राजकोषीय क्षमता दोबारा मजबूत करनी होगी और आपूर्ति पक्ष की अर्थव्यवस्था को झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम बनाना होगा।
टेनरेरो ने बढ़ती उधारी लागत और कर्ज चुकाने के बढ़ते खर्च को प्रमुख खतरा बताया। यदि सरकारें अपने बजट घाटे पर नियंत्रण नहीं रखती हैं, तो ब्याज भुगतान के कारण सामाजिक सेवाओं और बुनियादी ढाँचे पर होने वाला आवश्यक खर्च प्रभावित हो सकता है। इससे भविष्य में आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए देशों के पास पर्याप्त वित्तीय भंडार नहीं बचेगा। उन्होंने तत्काल राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) की आवश्यकता बताई और जोर दिया कि सरकारों की ओर से दी जाने वाली कोई भी सहायता सीमित दायरे में और अस्थायी होनी चाहिए।
IMF की अधिकारी ने केंद्रीय बैंकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियामकों को मौद्रिक नीति में पर्याप्त सख्ती बनाए रखनी चाहिए, ताकि महँगाई को निर्धारित लक्ष्य तक वापस लाया जा सके और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित हो। वित्तीय परिस्थितियों में समय से पहले ढील देने से महँगाई का दबाव दोबारा बढ़ने का जोखिम है।
IMF का मानना है कि अनुशासित राजकोषीय नीति और केंद्रीय बैंकों की संतुलित मौद्रिक कार्रवाई का संयोजन ही वित्तीय प्रणाली को आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा।