
Reuters ने आधिकारिक आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ब्रिटेन का कुल सरकारी कर्ज पहली बार प्रतीकात्मक 3 ट्रिलियन पाउंड (लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) के स्तर को पार कर गया है। सरकारी देनदारियों में इस तेज वृद्धि का मुख्य कारण सरकारी खर्च में लगातार बढ़ोतरी है। सितंबर में सरकार की शुद्ध उधारी 24.52 अरब पाउंड तक पहुँच गई, जो अधिकांश विश्लेषकों के अनुमान से काफी अधिक थी। बजट घाटा बढ़कर कुल 97.8 अरब पाउंड हो गया, जो सरकार की योजना से लगभग 6 अरब पाउंड अधिक है। हालाँकि, यह एक साल पहले दर्ज किए गए स्तर से लगभग 4.4 अरब पाउंड कम है।
कर्ज का यह झटका ऐसे समय में लगा है, जब महंगाई का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Office for National Statistics) के अनुसार, सितंबर में उपभोक्ता महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 3.5% हो गई। यह अक्टूबर 2025 के बाद एक महीने में हुई सबसे तेज वृद्धि है और लगातार तीसरे महीने महंगाई बढ़ी है। बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) ने सितंबर में अपनी नीतिगत ब्याज दर 3.75% पर अपरिवर्तित रखी, लेकिन चेतावनी दी कि कीमतों में और वृद्धि होने का जोखिम अभी भी बना हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार, मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष मौजूदा अस्थिरता का प्रमुख कारण है। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल आया है। ऊर्जा की बढ़ती लागत का सीधा असर ब्रिटेन में उत्पादकों के खर्च और घरेलू परिवारों के बजट पर पड़ रहा है।
अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 3.1% हुई और फिर सितंबर में इसमें और तेजी आई। इसके बाद बैंक ऑफ इंग्लैंड ने चेतावनी दी कि आने वाली कुछ तिमाहियों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने का सिलसिला जारी रह सकता है। इस स्थिति में लेबर पार्टी की सरकार के लिए बजट घाटे को नियंत्रित करना और रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुके सरकारी कर्ज को स्थिर करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
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