
जनवरी से अक्टूबर के अंत तक ऊर्जा की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी के कारण यूरोपीय संघ (EU) को कुल 127 अरब यूरो का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यह जानकारी दी। आयोग प्रमुख के अनुसार, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में ही कमोडिटी बाजारों पर लगातार दबाव के कारण यह नुकसान 21 अरब यूरो और बढ़ गया।
यूरोप में ऊर्जा संकट का मुख्य कारण मध्य पूर्व से होने वाली आपूर्ति में भारी बाधा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बंद होने के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। हीटिंग सीजन शुरू होने से पहले यूरोप के भूमिगत गैस भंडारण केंद्रों में गैस का स्तर पहले से ही कम था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
रूस से पाइपलाइन के जरिए होने वाले गैस आयात में भारी कटौती के कारण यूरोपीय संघ की कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से गैस खरीदनी पड़ी। इसके लिए मुख्य रूप से अमेरिका और नॉर्वे का रुख किया गया। कंपनियों को कम समय में और काफी अधिक कीमत चुकाकर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करनी पड़ी।
ऊर्जा पर रिकॉर्ड खर्च के बीच लिथुआनिया के ऊर्जा मंत्री लुकास साविकास ने यूरोपीय संघ के नेताओं से ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तत्काल अतिरिक्त उपाय तैयार करने की अपील की।
लिथुआनियाई मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो कुछ देशों में सस्ती रूसी गैस की आपूर्ति दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय है।
हालांकि, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ऊर्जा प्रतिबंधों पर दोबारा विचार करने की किसी भी संभावना को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। यूरोपीय संघ की स्वीकृत रणनीति के अनुसार, अगले साल के अंत तक रूस से पाइपलाइन के जरिए आने वाली प्राकृतिक गैस और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), दोनों का आयात पूरी तरह समाप्त करना होगा।
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