
लंदन से पूँजी का पलायन: क्रिस रोकॉस
ब्रिटेन में आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े पूँजी पलायनों में से एक देखने को मिल रहा है। इस पलायन का एक प्रमुख उदाहरण अरबपति हेज फंड संस्थापक क्रिस रोकॉस हैं, जो कभी ब्रिटेन में तीसरे सबसे बड़े करदाता थे और हर साल लगभग 330 मिलियन डॉलर टैक्स के रूप में देते थे।
ब्रिटेन की सख्त होती कर नीतियों और नॉन-डोमिसाइल (Non-dom) का दर्जा समाप्त किए जाने के फैसले के बाद रोकॉस का ब्रिटेन छोड़ने का निर्णय समझ में आता है।
हालाँकि, एथेंस को अपना नया ठिकाना चुनने के उनके फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रीस ने अधिक संपत्ति वाले लोगों के लिए विशेष कर सुविधाएँ लागू की हैं, जिसके कारण वह अप्रत्याशित रूप से दुनिया के वित्तीय अभिजात वर्ग के लिए एक आकर्षक ठिकाना बन गया है।

अर्जेंटीना का प्रयोग: पीटर थील
PayPal और Palantir के सह-संस्थापक पीटर थील, जेवियर मिलेई के नेतृत्व में किए जा रहे व्यापक आर्थिक सुधारों और अर्थव्यवस्था को सरकारी नियमों से मुक्त करने की मुहिम से आकर्षित होकर अर्जेंटीना चले गए हैं।
थील के लिए अर्जेंटीना, स्वतंत्रतावादी बाज़ार संबंधी विचारों को वास्तविक दुनिया में परखने का एक अवसर है।
उनका यह कदम एक व्यापक रुझान का संकेत देता है: निवेशक अब ऐसे देशों और क्षेत्रों को अधिक महत्व दे रहे हैं, जहाँ कारोबार के अनुकूल नियमों के साथ-साथ पूँजी और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार का सक्रिय समर्थन भी मिलता है।

दुनिया का अंतिम छोर: न्यूज़ीलैंड
धनाढ्य लोगों के बीच न्यूज़ीलैंड में बसने की माँग तेजी से बढ़ रही है। यह द्वीपीय देश अपनी राजनीतिक स्थिरता, स्वच्छ पर्यावरण और प्रमुख भू-राजनीतिक संघर्षों वाले क्षेत्रों से दूर स्थित होने के कारण अरबपतियों को आकर्षित कर रहा है।
सिलिकॉन वैली के कई दिग्गजों और निवेशकों के लिए न्यूज़ीलैंड में बड़ी-बड़ी संपत्तियाँ खरीदना व्यक्तिगत जोखिम प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
यह देश अब एक विशेष सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभरा है, जहाँ पूँजी के माध्यम से भौतिक सुरक्षा और उच्च गुणवत्ता वाला जीवन हासिल किया जा सकता है।

केपटाउन: अमीरों के लिए लग्जरी संपत्तियाँ किफायती कीमत पर
केपटाउन में लग्जरी घरों की कीमतों में वृद्धि टोक्यो से भी अधिक होने की संभावना है। यह शहर दक्षिणी गोलार्ध में एक प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में उभर रहा है।
निवेशक यहाँ की सुहावनी जलवायु, खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों और यूरोप की तुलना में प्रीमियम आवासों की अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण आकर्षित हो रहे हैं।
अटलांटिक महासागर के किनारे स्थित क्षेत्रों में गेटेड एस्टेट्स यानी सुरक्षा से घिरी आवासीय परियोजनाएँ विकसित की जा रही हैं। यह इस बात का संकेत है कि धनी लोग एशिया के अत्यधिक महँगे और पारंपरिक यूरोपीय महानगरों से बाहर ऐसे नए ठिकानों की तलाश कर रहे हैं, जहाँ उन्हें बेहतर जीवनशैली के साथ निवेश पर अधिक रिटर्न मिलने की संभावना हो।

दुबई: टैक्स-मुक्त सुरक्षित ठिकाना
ईरान युद्ध से पहले, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अमीर प्रवासियों के लिए सबसे आकर्षक ठिकाना था। व्यक्तिगत आयकर शून्य होने, पूँजीगत लाभ पर टैक्स न लगने और व्यापक ‘गोल्डन वीज़ा’ योजनाओं ने दुबई को 21वीं सदी का एक प्रमुख वित्तीय केंद्र बना दिया है।
यूरोप और एशिया के फैमिली ऑफिस (धनाढ्य परिवारों की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली संस्थाएँ), टेक्नोलॉजी कंपनियों के संस्थापक और ट्रेडर्स अपने मुख्यालय और कारोबारी गतिविधियाँ दुबई में स्थानांतरित कर चुके हैं।
दुबई ने दुनिया की वित्तीय राजधानी का दर्जा हासिल करने के लिए न्यूयॉर्क और लंदन को कड़ी चुनौती दी है। हालाँकि, भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण अब इस स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

यूरोप के वैकल्पिक ठिकाने: मिलान और स्विट्ज़रलैंड
ब्रिटेन से पूँजी के पलायन के बावजूद, मुख्य यूरोपीय देश धनी लोगों को अपने यहाँ बनाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इटली विदेशी आय पर एक समान, निश्चित कर व्यवस्था के माध्यम से करोड़पतियों को आकर्षित कर रहा है। इससे मिलान को यूरोप के उच्चवर्गीय समाज की वित्तीय राजधानी के रूप में स्थापित करने में मदद मिल रही है।
स्विट्ज़रलैंड अपनी लंबे समय से चली आ रही बैंकिंग परंपराओं और मजबूत कानूनी सुरक्षा के कारण अब भी धनी लोगों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
उच्च सांस्कृतिक स्तर और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था यूरोप को अपनी ओर पूँजी आकर्षित करने और उसे बनाए रखने में मदद करती है, भले ही वहाँ कड़े नियामक नियमों का दबाव क्यों न हो।

‘गोल्डन पासपोर्ट’ हासिल करने की होड़
धनी लोगों के बड़े पैमाने पर दूसरे देशों में बसने की वजह से विभिन्न देशों के बीच उन्हें आकर्षित करने की कड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। दुनिया अब दो खेमों में बँट गई है: कुछ देश नियमों को सख्त कर रहे हैं और संपत्ति पर टैक्स लगा रहे हैं, जबकि दूसरे देश ‘गोल्डन वीज़ा’ योजनाएँ शुरू कर रहे हैं, कर दरों में कटौती कर रहे हैं और बड़े निवेशकों को विशेष सुविधाएँ दे रहे हैं।
ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), पुर्तगाल और इटली ने विदेशी पूँजी को आकर्षित करने को अपनी प्रमुख सरकारी रणनीति बना लिया है।
तेजी से एक देश से दूसरे देश में जा सकने वाली पूँजी का अधिक अनुकूल नियमों वाले देशों की ओर पलायन पारंपरिक आर्थिक शक्तियों को अपनी कर व्यवस्था और वित्तीय नीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर रहा है।

पूर्ण आत्मनिर्भरता: सुपरबंकरों के निर्माण में तेजी
टैक्स बचाने के लिए दूसरे देशों में बसने के साथ-साथ, आलीशान भूमिगत सुरक्षित ठिकानों की माँग भी तेजी से बढ़ रही है। अरबपति ऐसे आत्मनिर्भर सुरक्षित ठिकाने बना रहे हैं, जहाँ संकट के दौरान जीवित रहने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हों।
इन बंकरों में बिजली की स्वतंत्र व्यवस्था, हवा को शुद्ध करने वाले सिस्टम और हाइड्रोपोनिक तकनीक से भोजन उगाने की सुविधाएँ शामिल हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक में मिट्टी के बिना पानी और पोषक तत्वों की मदद से पौधे उगाए जाते हैं।
न्यूज़ीलैंड, हवाई और अमेरिका के दूरदराज के इलाकों में ऐसी सुविधाएँ तेजी से विकसित हो रही हैं।
अब बंकरों में निवेश को महामारी, भू-राजनीतिक संकट और जलवायु संबंधी जोखिमों से बचाव के लिए एक तरह के बीमा के रूप में देखा जा रहा है।

सीमाओं से परे की दुनिया?
धन के इस नए पलायन की लहर वैश्विक अभिजात वर्ग के विकास में एक नए चरण को दर्शाती है—जहाँ लोग विकेंद्रीकृत और राष्ट्रीय सीमाओं से परे जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं। आज के अरबपति अब खुद को किसी एक देश तक सीमित नहीं रखते। वे अपनी संपत्ति, अचल संपत्ति और नागरिकता को अलग-अलग देशों में फैलाकर रखते हैं।
एक से अधिक पासपोर्ट और स्वतंत्र रूप से संचालित होने वाले आवास व्यवसायों और व्यक्तियों को किसी एक देश की नीतियों और राजनीतिक जोखिमों पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
यह रुझान राष्ट्रीय संप्रभुता की पारंपरिक अवधारणाओं पर सवाल खड़े करता है। अब धीरे-धीरे ऐसा होता जा रहा है कि देश पूँजी को आकर्षित करने के बजाय, पूँजी खुद तय करती है कि उसे किस देश में जाना है। इससे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का स्वरूप बदल रहा है।